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Showing posts from August, 2021

एक बार एक भेड़िया शेर के शाशन से बड़ा तंग आ गया।

 एक छोटी सी कहानी है - एक बार एक भेड़िया शेर के शाशन से बड़ा तंग आ गया। उसको लगा कि उसको तो कोई पूछता ही नहीं। सब शेर कोई ही पूछते है।  तो उसने दिमाग लगाया और शेर की खाल कही से ले आया। और शेर को चेतावनी देने लगा। उसे लगा कि उसके शेर की खाल में आते ही दूसरे शेर की सरकार गिर जाएगी क्यूंकि वो शेर का जीना दूबर कर देगा।  कुछ लोगो को भी उसने साथ लगा लिया जो भेड़िये को ही शेर मान रहे थे।  पर पहले वाले शेर को कोई फर्क नहीं पड़ा। भेड़िया परेशान , कभी कुछ करे कभी कुछ ! अलग अलग हथ कंडे अपना लिए पर कुछ न निकला।  पहले वाला शेर उसकी हरकतों पर कोई प्रतिकिर्या ही न दे।  कुछ समय बाद भेड़िये को समझ आया कि शेर ऐसे तो नहीं गिर सकता।  उसे लम्बे समय तक शेर को ललकारना पड़ेगा।  अब देखते है कि इस कहानी का क्या अंत होगा 

क्या किसी को अपने आराध्य पर भरोसा है ?

 हममे से बहुत से लोग धर्म प्रेमी होने का दावा करते है। वो अपने भगवान, आल्हा, गॉड की अपनी पद्ति के हिसाब से आराधना करते है।  पर जब भी मै उनको देखता हूँ कि तो सोचता हूँ कि क्या उनको अपने आराध्य पर भरोसा है। पूर्ण विश्वास है।  ज्यादातर मामलो में उनमे उस विश्वास की कमी होती है। यह विश्वास की ही कमी है कि वो जितना ज्यादा अपने आराध्य की आराधना करते है उतना ही ज्यादा उनमे कुंठा और दूसरे लोगो में अविश्वास की भावना बढ़ने लगती है।  यहाँ तक कि उनमे खुद पर भी विश्वास की भावना नहीं रहती।  चलो समझने कि कोशिश करते है  लोग आतंकवादी क्यों बनते है ? क्या वो अपने आराध्य की आराधना नहीं करते है। करते है दूसरे लोगो से ज्यादा करते है। वो चाहते है कि केवल उनके आराध्य की ही पूजा हो और किसी की न हो।  पर क्या उनको अपने आराध्य पर विश्वास है ? तो उत्तर होगा - नहीं  आतंकवाद को वर्तमान समय में एक ही लक्ष्य है कि दूसरे धर्मो के लोगो को मिटाना।  वो यह काम खुद करना चाहते है क्यूंकि उनको लगता है कि उनको यह करना चाहिए और विडंबना यह है कि वो अपने आराध्य को सबसे शक्तिशाली मानते है...