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भारत में आज कल आंदोलन इतने क्यों हो रहे है।

भारत में आज कल आंदोलन इतने क्यों हो रहे है।  इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि विपक्ष बिलकुल असहय हो चूका है। और अब उसकी पूर्ति करने के लिए और लोगो तक पहुँचने के लिए आपको एक मंच की जरूरत है। जो काम आंदोलन कर रहे है।  2012 में भारत ने दशकों बाद आंदोलन की ताकत को देखा था और उस आंदोलन में भारत के भविष्य को पूरी तरह बदल कर रख दिया। उससे लोगो को आंदोलन की ताकत का पता लगा।  सबसे मजेदार बात उससे एक राजनितिक पार्टी का जन्म हुआ जो इसे एक लाभदायक व्यापार के रूप में प्रदर्शित भी करती है।  आंदोलन की ताकत को देखते हुए कुछ लोग आंदोलन करते है और कुछ लोग इससे जुड़े लाभ के लिए आंदोलन करते है।  अब यह भविष्य की गोद में है कि इन आंदोलनों के बाद कैसी दिशा देश को मिलेगी। और किससे इसको फायदा होगा। 

क्या किसी मनुष्य के पास जाने से यह पता लग सकता है कि वह अच्छा है या बुरा ?

मुझे लगता है कि हम किसी मनुष्य को छू कर या उसके पास जाने मात्र से अनुभव कर सकते है कि वो हमारे बारे में अच्छा सोचता है या बुरा।  हम उसके विचारो को तो नहीं पढ़ सकते पर उसकी प्रतिक्रिया से या उसके शारीरिक द्रष्टिकोण से अहसास कर सकते है कि वो आपके बारे में क्या महसूस कर रहा है।  मेरा मानना है कि हर व्यक्ति से एक ऊर्जा का प्रभाव होता है। हर परिस्थिति में, हर मानसिक अवस्था में और हर तरह के विचारो में (चाहे वो बुरे हो या अच्छे) एक अलग तरह की ऊर्जा निकलती है।  अगर आपमें इसको थोड़ी सी भी समझने की कला है तो आप किसी के पास जाते ही अनुभव कर सकते हो कि सामने वाला व्यक्ति आपके बारे में अच्छा सोचता है या गलत। वो आपके साथ विश्वास कायम करेगा या विश्वासघात।  उसके साथ रहकर आपको अच्छा अनुभव होगा या गलत।  जरूरी नहीं कि अगर एक व्यक्ति आज आपके बारे में सही सोच रखता है। आपका विश्वास पात्र है तो वो अगले क्षण भी वही होगा।  हो सकता है कि उसके विचार बदल गए हो।  उसका व्यवहार आपको यह नहीं बता पायेगा पर उससे निकल रही ऊर्जा का प्रभाव सकारात्मक है या नकारात्मक, इस बात से पता करना सरल ह...

एक बार एक भेड़िया शेर के शाशन से बड़ा तंग आ गया।

 एक छोटी सी कहानी है - एक बार एक भेड़िया शेर के शाशन से बड़ा तंग आ गया। उसको लगा कि उसको तो कोई पूछता ही नहीं। सब शेर कोई ही पूछते है।  तो उसने दिमाग लगाया और शेर की खाल कही से ले आया। और शेर को चेतावनी देने लगा। उसे लगा कि उसके शेर की खाल में आते ही दूसरे शेर की सरकार गिर जाएगी क्यूंकि वो शेर का जीना दूबर कर देगा।  कुछ लोगो को भी उसने साथ लगा लिया जो भेड़िये को ही शेर मान रहे थे।  पर पहले वाले शेर को कोई फर्क नहीं पड़ा। भेड़िया परेशान , कभी कुछ करे कभी कुछ ! अलग अलग हथ कंडे अपना लिए पर कुछ न निकला।  पहले वाला शेर उसकी हरकतों पर कोई प्रतिकिर्या ही न दे।  कुछ समय बाद भेड़िये को समझ आया कि शेर ऐसे तो नहीं गिर सकता।  उसे लम्बे समय तक शेर को ललकारना पड़ेगा।  अब देखते है कि इस कहानी का क्या अंत होगा 

क्या किसी को अपने आराध्य पर भरोसा है ?

 हममे से बहुत से लोग धर्म प्रेमी होने का दावा करते है। वो अपने भगवान, आल्हा, गॉड की अपनी पद्ति के हिसाब से आराधना करते है।  पर जब भी मै उनको देखता हूँ कि तो सोचता हूँ कि क्या उनको अपने आराध्य पर भरोसा है। पूर्ण विश्वास है।  ज्यादातर मामलो में उनमे उस विश्वास की कमी होती है। यह विश्वास की ही कमी है कि वो जितना ज्यादा अपने आराध्य की आराधना करते है उतना ही ज्यादा उनमे कुंठा और दूसरे लोगो में अविश्वास की भावना बढ़ने लगती है।  यहाँ तक कि उनमे खुद पर भी विश्वास की भावना नहीं रहती।  चलो समझने कि कोशिश करते है  लोग आतंकवादी क्यों बनते है ? क्या वो अपने आराध्य की आराधना नहीं करते है। करते है दूसरे लोगो से ज्यादा करते है। वो चाहते है कि केवल उनके आराध्य की ही पूजा हो और किसी की न हो।  पर क्या उनको अपने आराध्य पर विश्वास है ? तो उत्तर होगा - नहीं  आतंकवाद को वर्तमान समय में एक ही लक्ष्य है कि दूसरे धर्मो के लोगो को मिटाना।  वो यह काम खुद करना चाहते है क्यूंकि उनको लगता है कि उनको यह करना चाहिए और विडंबना यह है कि वो अपने आराध्य को सबसे शक्तिशाली मानते है...

एक आंख से दुनिया कितनी एक लगती है

बहुत बार देखा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर लेता है तो वो सबसे उम्मीद करता है कि वो भी यही करे या वो सबको बहला कर या जोर से धर्म परिवर्तन की कोशिश करता है।  ऐसा क्यों होता है ? इसका जवाब साधारण सा है।  जब कोई व्यक्ति काना हो जाता है तो उसको लगता है कि वो आँखों वालो के बीच नहीं रह सकता। फिर वो काना होने के फायदे गिनवाने लग जाता है। एक आंख से दुनिया कितनी एक लगती है यह गिनवाने लग जाता है।  ऐसी ऐसी बाते करने लग जाता है जिनका कोई भी तर्क नहीं होता। पहले प्यार से बहकाने की कोशिश करता है और जब कोई नहीं मानता तो वो धमकियां देना शुरू कर देते है।  उनको लगता है कि अगर वो काने हो गए है तो सबको काना कर देंगे। अगर सब काने हो जायेंगे तो उनको शन्ति मिल पायेगी। क्यूंकि धर्म परिवर्तन के बाद एक गलानि सी मन में पैदा हो जाती है और उस गलानि को खत्म करने के लिए और अपने निर्णय को सही साबित करने के लिए वो केवल नए अपनाये धर्म का ही गुणगान करते रहते है और दुसरो को भी यही करने के लिए प्रेरित करता है।  ऐसा नहीं है कि उसको कुछ ज्ञान की प्राप्ति हुए या उसको दूसरे धर्म में ...

कुछ चीज़ो में खुद को नष्ट करने की शक्ति होती है।

 कुछ चीज़ो में खुद को नष्ट करने की शक्ति होती है। यह ज्यादातर चीज़ो में साधारणतय पायी जाती है।  कहते है कि किसी का सही स्वरूप देखना है तो उसको असीमित पैसा और ताकत दे दो। वो क्षण भर में अपना वास्तविक रूप दिखा देगा।  यहाँ से उसके उद्गम की या उसके विनाश की कहानी शुरू होगी।  कुछ व्यक्तियों या चीज़ो में यह प्रवृति होती है कि जब तक उनमे ताकत का या शक्ति का स्तर कम है तब तक वो संतुलित होती है और जैसे ही उनकी ताकत का या शक्ति का स्तर बढ़ता है वो असंतुलित हो जाती है।  तब दो रास्ते होते है। या तो इस अधिक मिली ताकत को नियंत्रित किया जाया या यह उस व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु को नष्ट कर देगी।  ऐसा इतिहास में बहुत बार होता है। जब कोई भी व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु अपने चरम पर होता है वहाँ उसका पतन शुरू हो जाता है। ऐसा केवल अतरिक्त प्राप्त ताकत या शक्ति को संतुलित न कर पाने से ही होता है।  अतरिक्त शक्ति एक नया नजरिया ले कर आती है। अपने आस पास स्थित दूसरे व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु तुच्छ लगने लगते है।  तब शुरू होता है शक्ति क...

ज्यादातर नेता आंदोलन का लाभ नहीं भोग पाते

दुनिया में आंदोलनों या क्रांतियों का इतिहास बड़ा ही रोचक रहा है।  कौन सा आंदोलन/क्रांति सफल रही , कौन सी असफल, कौन सही है , कौन गलत, उसके बारे में यह विचार नहीं है। यह लेख है आंदोलन/क्रांति से जुड़े एक बहुत ही रोचक तत्य के बारे में जो है कि आंदोलन/क्रांति का लाभ हमेशा तीसरा व्यक्ति ले जाता है।  आंदोलन//क्रांति एक तरह से विरोद्ध के रूप में परभाषित होता है। जब एक वर्ग, दूसरे वर्ग /सरकार/ तानाशाह के खिलाफ कोई मुहीम छेड़ता है तो उसको हम आंदोलन या क्रांति का नाम देते है।  जो वर्ग आंदोलन कर रहा होता है उसके कुछ नेता होते है जो उस आंदोलन का मार्गदर्शन करते है। कुछ नेता निस्वार्थ भाव से जुड़े होते है और कुछ स्वार्थ भाव से। ज्यादातर मामलो में हमने देखा है कि जो नेता किसी आंदोलन/क्रांति का नेतृत्व करते है उनमे से ज्यादातर नेता उसका लाभ नहीं भोग पाते। या तो वो मृत्यु पर्यन्त पहुंच जाते है यानि बहुत ही बजुर्ग हो जाते है और किसी और को उसका लाभ भोगना पड़ता है या अगर वो उसको हासिल कर भी ले तो कुछ ही समय में या तो उनकी मृत्यु हो जाती है या उनको उसको छोड़ना पड़ता है।  कुछ बहुत ही कम मा...