ज्यादातर नेता आंदोलन का लाभ नहीं भोग पाते

दुनिया में आंदोलनों या क्रांतियों का इतिहास बड़ा ही रोचक रहा है। 

कौन सा आंदोलन/क्रांति सफल रही , कौन सी असफल, कौन सही है , कौन गलत, उसके बारे में यह विचार नहीं है। यह लेख है आंदोलन/क्रांति से जुड़े एक बहुत ही रोचक तत्य के बारे में जो है कि आंदोलन/क्रांति का लाभ हमेशा तीसरा व्यक्ति ले जाता है। 

आंदोलन//क्रांति एक तरह से विरोद्ध के रूप में परभाषित होता है। जब एक वर्ग, दूसरे वर्ग /सरकार/ तानाशाह के खिलाफ कोई मुहीम छेड़ता है तो उसको हम आंदोलन या क्रांति का नाम देते है। 

जो वर्ग आंदोलन कर रहा होता है उसके कुछ नेता होते है जो उस आंदोलन का मार्गदर्शन करते है। कुछ नेता निस्वार्थ भाव से जुड़े होते है और कुछ स्वार्थ भाव से।

ज्यादातर मामलो में हमने देखा है कि जो नेता किसी आंदोलन/क्रांति का नेतृत्व करते है उनमे से ज्यादातर नेता उसका लाभ नहीं भोग पाते। या तो वो मृत्यु पर्यन्त पहुंच जाते है यानि बहुत ही बजुर्ग हो जाते है और किसी और को उसका लाभ भोगना पड़ता है या अगर वो उसको हासिल कर भी ले तो कुछ ही समय में या तो उनकी मृत्यु हो जाती है या उनको उसको छोड़ना पड़ता है। 

कुछ बहुत ही कम मामलो में ऐसा होता है कि सही अर्थो में हम कह पाए कि किसी नेता ने उसका लाभ भोगा हो। 

यह कुछ ऐसा है कि लड़ता कोई ओर रहता है और अंत में विजेता किसी और को घोषित कर दिया जाता है। 

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