कुछ चीज़ो में खुद को नष्ट करने की शक्ति होती है।

 कुछ चीज़ो में खुद को नष्ट करने की शक्ति होती है। यह ज्यादातर चीज़ो में साधारणतय पायी जाती है। 

कहते है कि किसी का सही स्वरूप देखना है तो उसको असीमित पैसा और ताकत दे दो। वो क्षण भर में अपना वास्तविक रूप दिखा देगा। 

यहाँ से उसके उद्गम की या उसके विनाश की कहानी शुरू होगी। 

कुछ व्यक्तियों या चीज़ो में यह प्रवृति होती है कि जब तक उनमे ताकत का या शक्ति का स्तर कम है तब तक वो संतुलित होती है और जैसे ही उनकी ताकत का या शक्ति का स्तर बढ़ता है वो असंतुलित हो जाती है। 

तब दो रास्ते होते है। या तो इस अधिक मिली ताकत को नियंत्रित किया जाया या यह उस व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु को नष्ट कर देगी। 

ऐसा इतिहास में बहुत बार होता है। जब कोई भी व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु अपने चरम पर होता है वहाँ उसका पतन शुरू हो जाता है। ऐसा केवल अतरिक्त प्राप्त ताकत या शक्ति को संतुलित न कर पाने से ही होता है। 

अतरिक्त शक्ति एक नया नजरिया ले कर आती है। अपने आस पास स्थित दूसरे व्यक्ति, समूह, समाज, देश, धर्म और वस्तु तुच्छ लगने लगते है। 

तब शुरू होता है शक्ति का प्रदर्शन। 

और यह शक्ति प्रदर्शन दुसरो के विनाश के साथ नहीं खुद के विनाश के साथ खत्म होता है। 

बड़ी बड़ी सल्तने , दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति केवल एक साधारण जन समूह के सामने हार जाते है। अपने आप को शक्तिशाली और सरकारों को चनौती देने वाले समूह भी थोड़ी अतरिक्त ताकत मिलते ही पल भर में खत्म हो जाते है। 

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