क्या धन अपने आप में बुरा है ? क्या पैसा सब बुराइयों की जड़ है ?

 क्या धन अपने आप में बुरा है ? क्या पैसा सब बुराइयों की जड़ है ?

अगर ऐसा है तो क्यों फिर सब पैसो के पीछे अपनी सारी जिंदगी गुजार देते है। क्यों लोग दिन रात बुरा बनने के लिए काम कर रहे है ? तो क्या हम सब बुरे है क्युकी हम सब धन के लिए ही सारे कार्य करते है। नौकरी, व्यवसाय, राजनीती और भी बहुत कुछ। 

धन के अगर इतिहास की बात की जाये तो हम मुनष्य करीबन 6000 साल से पहले से धन का उपयोग कर रहे है। ये अलग बात है कि उस वक़्त पैसे आज वाले रूप में नहीं थे। तब चांदी, ताम्बे, सोने के सिक्के या मोहरे चलती थी। समय के साथ साथ धन का प्रकार बदलता रहा और आज यह अपनी वर्तमान स्थिति में है। कल क्या पता किस रूप में हो ?

हर धर्म ने धन को अपने ग्रंथो में स्थान दिया है और ज्यादातर ने धन को गलत नजर से ही देखा है। लगभग सभी ने धन को बुराइयों की जड़ कहा है। 

चलो आज जानने की कोशिस करते है कि क्या वास्तव में धन बुरा है ?

धन बुरा नहीं हो सकता, क्यूंकि धन से बहुत सारे अच्छे काम भी किये जाते है। वर्तमान समय में धन से ही हमारे जीवन के जीने योग्य सामान खरीदे जा सकते है। एक सम्मान पूरक जिंदगी जीने के लिए आज के समय में धन बहुत जरूरी है।  हम केवल धन को बुरा कह कर झुठला नहीं सकते।  हम सबको धन के बारे में पूरा ज्ञान है कि वो क्या क्या कर सकता है। 

इसीलिए अगर आप कहो कि मुझे धन से नफरत है क्यूंकि वो बुराइयों की जड़ है तो यकीनन आपके पास धन नहीं है। आप दिन रात धन कमाने के लिए प्रयास तो कर रहे है पर आप धन को इकठा नहीं कर पा रहे। और अपनी निराशा व्यक्त करने के लिए धन को बुरा बता रहे हो। 

अब असल बात पर आते है 

धन बुरा नहीं होता। धन का मोह बुरा होता है। धन का अनावश्यक संग्रह बुरा होता है। 

अपने सुना होगा कि किसी के पास धन आया तो वो गलत आदतों में लग गया। गलत काम करने लग गया। जिसके कारण उसका परिवार ख़राब हो गया , बच्चे बिगड़ गए इत्यादि। 

पर असल में धन कुछ नहीं करता। धन न किसी चीज़ को लाता है और न किसी चीज़ को खत्म करता है। धन केवल उसी चीज़ को बढ़ाता है जो मुनष्य में पहले से ही मजूद हो। अगर मनुष्य पहले से ही लोभी है तो पैसा आने के बाद उसका लोभ और बढ़ जायेगा। अगर मनुष्य पहले से ही गलत काम करता है या उसके मन में दबी इच्छा है तो पैसा उन कामो को या इच्छाओ को बढ़ाएगा। मतलब धन मनुष्य के असली रूप को उजागर करता है। 

इसके विपरीत भी होता है। पैसा उन लोगो की अच्छाई को भी बढ़ाता है जो पहले से ही अच्छे है। वो पैसा आने के बाद पहले से ज्यादा लोगो की मद्द्त करते है। पहले से जयादा विनर्मता से बात करते है। परिवार के साथ अच्छी तरह रहते है , बच्चो का और अच्छी तरह पालन पोषण करते है। 

इसीलिए कभी भी यह मत सोचो की धन बुरा है। 

इसके अलावा धन कमाने में किस तरीके का उपयोग किया गया है। उस बात पर भी निर्भर करता है की धन का आप पर क्या प्रभाव पड़ता है। गलत तरीके से धन ज्यादातर मामलो में गलत उदेश्यो में लिए ही कमाया जाता है इसी वजह से वो गलत उदेश्यो की मानसिकता को बढ़ा देता है और उसी तरह परिणाम देता है। 

जिस तरह स्थिर पानी एक जगह अगर काफी दिनों तक इकठा रहे तो बदबू करने लगता है। विषनाओ से ग्रष्ट हो जाता है , स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। उसी तरह अनावश्यक रूप से इकठा किया हुआ धन भी एक तरह से मानसिक अस्थिरता पैदा करता है। यह मानसिक अस्थिरता अस्वस्थ्य या गलत कार्यो की और अग्रषित करती है।

तो धन बुरा नहीं होता। धन का मोह बुरा होता है। 

अगर आपने उचित तरीको से धन कमाया है। उसका भरपूर उपयोग किया जाये। धन का मोह न किया जाये। उसका प्रबंधन और निवेश किया जाये तो मनुष्य बिना किसी गलत असर के धन का लाभ उठा सकता है। चाहे फिर उसके पास करोड़ो हो या अरबो हो। 

ताकत के मामले में भी यही बात सही मायने में सही साबित होती है। 

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