कटटरता किसी भी धर्म के लिए बोझ बन जाती है !

 कटटरता एक आवरण की तरह होती है। 

वो कुछ तह तक तो सुरक्षा देता है पर अगर आप तह पर तह चढ़ाते जाओगे तो एक दिन आपका सुरक्षात्मक आवरण आपके लिए बोझ बन जायेगा। या तो आप उसके नीचे दब कर मर जाओगे या आप पूरा का पूरा आवरण ही त्याग दोगे और बिना आवरण के रहना पड़ेगा क्युकी आवरण की पीड़ा अब भी आपका पीछा नहीं छोड़ेगी। 

किसी धर्म के लिए उसकी कटटरता भी यही काम करती है। एक स्तर तक तो वो उसकी रक्षा कर सकती है पर अगर उसको बढ़ाते जाओगे तो वो उस धर्म के लिए ही आत्म भक्षक सिद्ध होगी और उस धर्म के विनाश का कारण बनती है। इसीलिए अगर आप अपने धर्म को सुरक्षित रखना चाहते हो तो आपको कटटरता का आवरण की तरह ही उपयोग करना चाहिए। 

अगर कटटरता का अनावश्यक रूप से हर बार उपयोग किया जाने लगा तो उस धर्म का बहुत ही जल्द विनाश सम्भव है। 

हर धर्म को लगता है कि उसका धर्म अमर है और वो कभी भी खत्म नहीं होगा इसीलिए वो उसको और कटटरता से भरते रहते है ताकि वो अपने धर्म को सुरक्षित कर सके किन्तु हो इसका विपरीत हो रहा होता है और धर्म अपने विनाश की तरफ बढ़ रहा होता है। 

दुनिया में आज मजूद धर्मो से पहले भी बहुत सारे धर्म पैदा हुए और नष्ट हुए और आगे भी होते रहेंगे। इसीलिए यह सोचने की भूल करना कि आपका धर्म अमर है और वो कभी नष्ट नहीं होगा तो यह कुछ ऐसा है जैसे यह सोचना की एक इंसान कभी भी मरने नहीं जा रहा और सदा के लिए जिन्दा ही रहेगा। 

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