क्या हमारे विचार किसी कार्य के परिणामो पर असर डालते है ?

हो सकता है कि मै यहाँ पर गलत हूँ पर मैंने एक चीज़ महसूस की है कि हमे हमारे कर्मो के हिसाब से मिलता है। हम किसी कार्य को किस विचार या भावना से कर रहे है उसका उसके परिणाम पर बहुत गहरा फर्क पड़ता है। 

दो व्यक्ति अगर एक ही काम को एक ही तरह से एक ही समय पर करते है। एक जितनी मेहनत करते है। एक जितना समय देते है। हर प्रतिकिर्या समान होती है तब भी परिणाम बहुत ज्यादा अंतर् वाला हो सकता है। 

दो किसान एक ही समय पर फसल बोते है। बिलकुल समान अवधि में पानी देते है , खाद देते है, एक ही जैसे मौसम को दोनों किसानो की फसल सहन करती है, और वो सभी कार्य एक ही तरह करते है पर फसल का जो उत्पादन होता है वो बिलकुल अलग होता है। 

ऐसा क्यों ? इसका उत्तर कोई भी सही तरह नहीं दे सकता। पर यह सार्वभौमिक सत्य की कभी भी परिणाम समान नहीं होगा। 

हमारे कर्मो के अतरिक्त हमारे विचार और हमारी उस कार्य के पीछे की भावना भी बहुत हद तक उसके परिणाम को परवर्तित करती है। इस विषय पर एक अनुशंधान की जरूरत है कि यह किस तरह होता है। 

"किताब 'as the man thinketh' के अनुसार आपको आपके विचारो के हिसाब से परिणाम मिलता है। अगर विचार अच्छे होंगे तो परिणाम अच्छा होगा और अगर विचार गलत होंगे तो परिणाम भी गलत ही होगा।" 

मेरे हिसाब से विचारो का यह खेल बड़ा ही अनोखा है। हम किसी व्यक्ति के विचारो को नहीं देख सकते और जिस चीज़ को नहीं देख सकते उसकी गणना करना भी बहुत मुश्किल हो जाता है। तो यह अनुमान लगाना की किस व्यक्ति की भावना और विचार किसी कार्य के प्रति सही है और किस व्यक्ति के गलत, बहुत ही उलझन भरा कार्य होता है। 

पर विचारो में बहुत ताकत होती है यह मैने अपनी जिंदगी के हर मोड़ पर महसूस किया है। अगर आपको यह महसूस करना है तो आपको पहले विश्वास करना होगा कि विचारो में बहुत ताकत होती है। उसके बाद जो आप बनना चाहते है उसका अपने मन में विचार पैदा करना है। यह विचार आपको आपको आपके लक्ष्य की तरफ ले जाने वाले कार्य की तरफ प्रेरित करना शुरू कर देंगे। अब यह आप पर है कि आप उन कार्यो को करना शुरू करते है या केवल स्वप्नों में ही खोये रहते है। कार्य, विचारो को प्रत्यक्ष करने वाली पूंजी है। तो  कार्य के बिना विचार महज अपने आप से किया गया धोखा है। 


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