अपना नेता सही तरह चुनना जरूरी है
साधरणतय: दो तरह के नेता (लीडर) होते है। एक अच्छे और एक बुरे।
दोनों में अंतर् पता करना आसान नहीं होता। दोनों ही बहुत अच्छे वक्ता होते है , दोनों ही सपने दिखाने वाले होते है, दोनों ही यह अहसास कराते है कि वो आपके भले के लिए लड़ रहे है। दोनों के पीछे अच्छी भीड़ होती है। दोनों ही पहली नजर में अच्छे लीडर नजर आते है।
पर दोनों का अनुशरण करने से परिणाम बिलकुल ही विपरीत आता है।
मैंने अपनी जिंदगी में दो बड़े आंदोलन देखे है।
एक 2012 में अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और 2020 का किसान आंदोलन।
दोनों ही बड़े स्तर पर किये गए और दोनों को ही लोगो का बड़ा समर्थन मिला।
पर दोनों में क्या अंतर् है ?
दोनों में केवल लीडर का अंतर् है। और यह अंतर् इतना बड़ा है कि इसने इन आंदोलनों के साथ जुड़े लोगो की जिंदगी बदल दी।
अन्ना हजारे की लीडरशिप में उसके साथ जुड़े लोगो ने एक नए भारत का सपना सजाया और उनमे से कुछ भारतीय राजनीती में सफल हुए , कुछ विचारो के परिवर्तन से बिज़नेस में सफल हुए और कुछ दूसरे क्षेत्रो में।
पर किसान आंदोलन के साथ जुड़े लोगो को उसके नेताओ की वजह से बहुत शर्मिंदगी और क़ानूनी दांव पेंचो का सामना करना पड़ा। 26 जनवरी को फैलाया गया उतपाद उसका उदारहण है।
सभी नेताओ ने अपने आप को सुरक्षित कर लिया पर हजारो लोगो को जेल और न्यायालयो के चक्र खाने के लिए छोड़ दिया। उसके बाद भी इनके लीडर इनको कानून हाथ में लेने के लिए उकसाते है जिसकी वजह से उनको क़ानूनी धाराओं का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों ही आंदोलन अपनी जगह सही है पर उनके साथ जुड़े लोगो की जिंदगी पर वो कैसा असर डाल रहे है यह उसके नेताओ पर निर्भर करता है।
जिस तरह किसान आंदोलन के नेता कार्य कर रहे है , उसके हिसाब से मुझे लगता है कि जिसके लिए वह आंदोलन कर रहे है वो हो या न हो पर उसके साथ जुड़े बहुत से लोगो की जिंदगी यह ख़राब कर जायेगा जो या तो अपना समय जेलों में काटेंगे या इस नयी मानसिकता से वो बदलते दौर में बहुत पीछे द्खेल दिए जायेंगे और कष्ट पूर्ण जीवन जीने के लिए मजबूर हो जायेंगे।
इसीलिए अपना नेता सही तरह चुनना जरूरी है जब आप बदलाव करने निकलते है।