हर कौम भी एक परिस्थिति में अलग अलग व्यवहार करती है
किसी भी परिस्थिति में हर व्यक्ति की अलग अलग प्रतिकिर्या होती है। इसी तरह हर कौम भी एक परिस्थिति में अलग अलग व्यवहार करती है। रोहिंग्या लोग भी देश निकर्सित होने के बाद दूसरे देशो में रहने को मजबूर है और तिब्बती लोग भी।
पर दोनों के व्यवहार में आपको जमीन आसमान का फर्क नजर आएगा। पिछले दिनों मै एक खबर पढ़ रहा था जिसमे रोहिंग्यों ने बांग्लादेश के अधिकारियो पर ही पत्थर बाजी कर दी। जबकि बांग्लादेश ने ही उनको शरण दी हुई है। एक अहसान परमोस लोगो की तरह उन्होंने काम किया। जबकि जिस देश ने उनको शरण दी उनका सहयोग उनको देना चाहिए था।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी होता है। एक व्यक्ति उस समाज का दर्पण होता है जिसमे वो रहता है और समाज उन व्यक्तियों का दर्पण होता है जिसमे वो रहते है। सब आपस में एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।
किसी व्यक्तियों के समूह के व्यवहार से आप पूरी कौम की मानसिकता का अंदाजा लगा सकते हो।
कोई यहां पर तर्क दे सकता है कि सभी मनुष्य समान नहीं होते। हर कौम में सभी तरह के लोग होते है।
मै पूरी तरह इस बात से सहमत हूँ। पर जब एक समूह या समाज कोई निर्णय लेता है तो उसमे कहीं न कहीं सभी के मन में दबी इच्छा छुपी होती है। अच्छे विचारो और अच्छे लोगो को जब समूह में हमियत नहीं दी जाती , उनके विचारो को नकार दिया जाता है। कुछ दुष्ट लोग अपने निजी स्वार्थ या अज्ञान के कारण जब फैसला करते है और समाज मोन रह कर उसको सहमति देता है या उसका प्रतिरोध नहीं करता तो उसको पूरी कौम या समाज का ही निर्णय माना जाता है।
कहते है कि किसी भी देश या समाज की दुर्दशा का कारण दुष्ट लोग नहीं होते बल्कि अच्छे लोग होते है जो यह जानते हुए भी कि गलत हो रहा है उसका विरोध नहीं करते , चाहे फिर वह डर के कारण हो या मोन स्वकीर्ति के।
फिर जब उसके परिणाम भुगतने पड़ते है तो यह कह कर आप अपना पीछा नहीं छूटा सकते कि बुरे लोग हर कौम में होते है और अच्छे भी।
परिणाम तो सबको समान ही भुगतने पड़ते है।
हो सकता है कि तत्कालीन लगे कि बुरे कामो का लाभ हो रहा है पर भविष्य में परिणाम मिलना निश्चित है और प्रकृति के नियमो को बदलना सम्भव नहीं होता।